क्यूँ ना मैं साधु बन जाऊं

क्यूँ ना मैं साधु बन जाऊं

सुबह सुबह  मेरा फ़ोन बजा , मैसेज आया , डिअर सर , इस महीने की EMI है बकाया ,    इस माया के जाल को कैसे मैं  सुलझाऊँ ,                         क्यूँ ना मैं साधु बन जाऊं ।                   साल भर, रगड़ रगड़ मैंने क्या पाया ,                      इस बार भी 5 % इंक्रीमेंट...
क्यों आज वो तारे नहीं दिखते

क्यों आज वो तारे नहीं दिखते

      एक हाथ में बियर लिए,        घर को लौट रहा था मैं , एक हाथ में स्टीयरिंग  लिए, पुरानी बातें सोच रहा था में।             पंद्रह साल पहले , इसी रस्ते से ,  स्कूटर के पीछे बैठ , पापा संग जाता था,                ठण्डी ठण्डी हवा का लुफ्त उठा ,           आस्मां के सारे...
क्यों तुम अच्छे कपडे नहीं पहनती

क्यों तुम अच्छे कपडे नहीं पहनती

एक मजदूर की लड़की से , मालिक की लड़की ने पूछा  , कोई द्वेष नहीं था मन में  , बचपन की मासूमियत से उसने पूछा ।                                     क्यों तू सुबह से श्याम ,                                         मिटटी में है खेलती ,                               यह फटे...
में यहां क्या करने आया ?

में यहां क्या करने आया ?

      एक बड़े होटल में मैंने खाना खाने का मन बनाया,      सकुचाया सा एक युवा वेटर मेरे टेबल पर आया।  ग्लास में पानी डालते वक़्त उसका हाथ कंपकपाया, अनायास ही, कांच का प्याला उसने फर्श पे गिराया।                                                          दौड़ते हुए उस होटल का...

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