Poems

बन के रहुँगा , इस देश का रक्षक !

इन पहाड़ों में मैं बड़ा हुआ , इस मिट्टी से हूँ जुड़ा हुआ , एक ही सपना देखा अब तक, बन के रहुँगा , इस देश का रक्षक ! हर दरिया पार कर जाऊंगा, एक घातक हथियार बन जाऊंगा , पा के रहुंगा , सरहद की झलक , बन के रहुँगा , इस देश का रक्षक ! तिरंगा हर चोटी पर लहराऊंगा , हँसते हँसते...

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काश ये बेजुबान बोल पाते !

काश ये बेजुबान बोल पाते ! तो हम ना इन्हे यूँ बेरहमी से खाते , इनकी मार्मिक चीख पुकार सुन, शायद तुम भी शाकाहारी हो जाते।  काश ये बेजुबान बोल पाते ! तो हम ना इनसे लठ मार काम कराते , दो चार नसीहतें ये तुम्हें भी सुनाते , शायद तुम थोड़ा कम आलसी हो जाते।  काश ये बेजुबान...

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तुमने उनकी चीजें रखी, हमने यादें रखी !!!

मेरी दुनिया का वो एक अनमोल तारा था , हमें वह अपनी जान से भी प्यारा था , झूझते-झूझते एक दिन उनकी साँसे थमी , तुमने उनकी चीजें रखी, हमने यादें रखी !!!                   उनके जाने के बाद, चारों तरफ अँधेरा था ,               तुम्हारे बनावटी आंसु , सिर्फ एक छलावा था,      ...

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बता, तुझे मैं कहाँ ले जाऊँ !!!

एक साल से तू मेरा सपना था , यूँ अचानक ही कैसे टूट गया , तेरी माँ को मैं , कैसे ये बताऊँ , बता, तुझे मैं कहाँ ले जाऊँ !!!                    तेरी दादी के यह बहते आंसु ,                    कैसे मैं रोक पाऊँ ,                    दर्द से झूझते तेरे दादा का गम,            ...

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माँ का हाथ पकड़, मैं चल दिया

               उन आँखों की आस देख, उस चहेरे ने मुझे सम्मोहित किया,       अपने कोमल पैरों पर खड़ा हो ,    माँ का हाथ पकड़, मैं चल दिया ।                                                                  आज उस चेहरे पर शिकन थी,                                            ...

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क्यूँ ना मैं साधु बन जाऊं

सुबह सुबह  मेरा फ़ोन बजा , मैसेज आया , डिअर सर , इस महीने की EMI है बकाया ,    इस माया के जाल को कैसे मैं  सुलझाऊँ ,                         क्यूँ ना मैं साधु बन जाऊं ।                   साल भर, रगड़ रगड़ मैंने क्या पाया ,                      इस बार भी 5 % इंक्रीमेंट...

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क्यों आज वो तारे नहीं दिखते

      एक हाथ में बियर लिए,        घर को लौट रहा था मैं , एक हाथ में स्टीयरिंग  लिए, पुरानी बातें सोच रहा था में।             पंद्रह साल पहले , इसी रस्ते से ,  स्कूटर के पीछे बैठ , पापा संग जाता था,                ठण्डी ठण्डी हवा का लुफ्त उठा ,           आस्मां के सारे...

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क्यों तुम अच्छे कपडे नहीं पहनती

एक मजदूर की लड़की से , मालिक की लड़की ने पूछा  , कोई द्वेष नहीं था मन में  , बचपन की मासूमियत से उसने पूछा ।                                     क्यों तू सुबह से श्याम ,                                         मिटटी में है खेलती ,                               यह फटे...

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चलो भैय्या तुम आगे जाओ

               वैसे ही गर्मी से थके है , इस भीड़ में, ये ठेला कहाँ भगाएं ,     ना तुम हमें हॉर्न मार सताओ ,      चलो भैय्या तुम आगे जाओ।                                                       अपनी कार की ठण्डी हवा का आनंद लिए,                                            ...

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में यहां क्या करने आया ?

      एक बड़े होटल में मैंने खाना खाने का मन बनाया,      सकुचाया सा एक युवा वेटर मेरे टेबल पर आया।  ग्लास में पानी डालते वक़्त उसका हाथ कंपकपाया, अनायास ही, कांच का प्याला उसने फर्श पे गिराया।                                                          दौड़ते हुए उस होटल का...

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