काश ये बेजुबान बोल पाते !

तो हम ना इन्हे यूँ बेरहमी से खाते ,

इनकी मार्मिक चीख पुकार सुन,

शायद तुम भी शाकाहारी हो जाते। 

काश ये बेजुबान बोल पाते !

तो हम ना इनसे लठ मार काम कराते ,

दो चार नसीहतें ये तुम्हें भी सुनाते ,

शायद तुम थोड़ा कम आलसी हो जाते। 

काश ये बेजुबान बोल पाते !

तो ना हम इन्हे धर्म के लिए इस्तेमाल कर पाते,

ये तुम्हें ही भाईचारे का पाठ पढ़ाते ,

शायद तुम थोड़ा और सहनशील हो जाते। 

पर क्या ये बेजुबान सच में नहीं बोल पाते ,

या हम इन्हें जान भूजकर , अनसुना हैं कर जाते,

कभी सुबह उठकर इन्हें सुनने की ठानो,

देखो ये कितने मधुर मधुर गीत हैं गाते। 

कौन कहता है, बेजुबान बोल नहीं पाते ,

शायद हम उनको सुनना ही नहीं चाहते ,

काश बेजुबान बोल पाते !

काश बेजुबान बोल पाते !

Pin It on Pinterest

Share This